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![]() आयोग की शक्तियां - आयोग की धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों का पालन करते समय और विशिष्टतया निम्नलिखित विषयों की बाबत किसी वाद का विचारण करने वालें किसी सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी, अर्थात -
राज्य सरकार क्षरा सूचियों का नियम कलीक पुनरीक्षण - राज्य सरकार पिछड़े वगो की ऐसी सूची में से उन वर्गो के नाम अपवर्जित करने के उद्देश्य से जो पिछड़े वर्ग के नहीं रह गए हैं या ऐसी सूची में पिछड़े वर्गो को सम्मिलित करने के उद्देश्य से किसी भी समय पुरीक्षण का कार्य हाथ में ले सकेगी और पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम के प्रवृत्त होने से दस वर्ष की समाप्प्ति तथा उसके पश्चातवर्ती अवधि पर ऐसे पुनरीक्षण का कार्य हाथ में लेगी । राज्य सरकार किसी पुनरीक्षण का कार्य हाथ में लेते समय आयोग से परामर्श करेगी ।
आवेदन पर कार्यवाही - आयोग को प्रापत शक्तियों के अधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला कलेक्टर, नोडल अधिकारी, संबंधित विभाग के अधिकारी तथा जन प्रतिनिधियों सें प्रतिवेदन प्राप्त किया जाता है । आवश्यकता पड़ने पर आयोग द्वारा अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए आवश्यक जानकारी लेकर, नियमों व प्रावधानों के तहत विवेचना करके संबंधित विभाग को आवश्यक काय्रवाही हेतु प्रेषित किया जाता है । आयोग द्वारा जब तक समस्या/प्रकरणों का निराकरण नहीं हो जाता तब तक कार्य की प्रगति से संबंधित विभाग यासंस्था से निरंतर जानकारी प्राप्त की जाती हैं तथा संबंधित को प्रकरण केसंबंध में वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाता है ।
आवेदन कैसे करें - पिछड़े वर्ग के कोई भी भाई-बहन सादे कागज पर अथवा शपथ पत्र के साथ या स्वयं के पास उपलब्ध अभिलेखों सहित सीधे आयोग को आवेदन अथरवा स्वयं उपस्थित होकर दे सके हैं या चाहे तो डाक से प्रेषित कर सकते हैं ।
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